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Hindi Moral Story-दूसरों में ‘अच्छाइयाँ’ ढूँढ़ें

एक दिन श्रील चेतन्य महाप्रभु पुरी (उड़ीसा) के जगन्नाथ मंदिर में गुरुड़ स्तंभ के सहारे खड़े होकर दर्शन कर रहे थे।

एक स्त्री वहां श्रद्धालु भक्तों की भीड़ को चीरती हुई देव-दर्शन हेतु उसी स्तंभ पर चढ़ गई और अपना एक पांव महाप्रभुजी के दाएं कंधे पर रखकर दर्शन करने में लीन हो गई।

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यह दृशय देखकर महाप्रभु का एक भक्त घबराकर धीमे स्वर में बोला, हाय!, सर्वनाश हो गया! जो प्रभु स्त्री के नाम से दूर भागते हैं, उन्हीं को आज एक स्त्री का पाँव स्पर्श हो गया! न जाने आज ये क्या कर डालेंगे।’

वह उस स्त्री को नीचे उतारने के लिए आगे बढ़ा ही था कि महाप्रभुजी ने सहज भावपूर्ण शब्दों में उससे कहा -‘अरे नहीं, इसको भी जी भरकर जगन्नाथ जी के दर्शन करने दो, इस देवी के तन-मन-प्राण में कृष्ण समा गए हैं, तभी यह इतनी तन्मयी हो गई कि इसको न तो अपनी देह और मेरी देह का ज्ञान रहा…..

अहा! ठसकी तन्मयता तो धन्य है……इसकी कृपा से मुझे भी ऐसा व्याकुल प्रेम हो जाए।

कहानी का निष्कर्ष

काम करते समय दूसरों की गलतियों की बजाय अच्छाइयां ढूँढना अपनी आदत में लें,यह आदत हमारे शिष्ट-व्यवहार को दर्शाएगी।