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11+ Akbar Birbal Stories in Hindi

पढ़िए Akbar Birbal Stories in Hindi जो बहुत ही मजेदार और चतुराई भरी हैं।

Akbar Birbal ki Kahani

1.सीढ़िया कितनी हैं

बादशाह अकबर और बीरबल महल के बाग में टहल रहे थे। शहंशाह मूड में थे। उन्होंने बीरबल से सवाल कर दिया, “बीरबल, क्या तुम्हें मालूम है कि तुम्हारी पत्नी की कलाइयों में कितनी चूड़ियां हैं?तुम तो दिन में कई बार पत्नी का हाथ पकड़ते होंगे।”

बीरबल दुविधा में पड़ गए। उन्होंने तो कभी इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया था। बीरबल कुछ देर तक चुप रहे, फिर बोले, “हुजूर, मेरा हाथ तो पत्नी के हाथ को कभी कभार ही पकड़ता है। लेकिन हुजूर, क्या आप बता सकते हैं कि आपकी दाढ़ी में कितने बाल हैं?”

बादशाह बीरबल की बात को नजरअंदाज कर गए और बोले, “बीरबल दाढ़ी के बाल की गिनती कर पाना नामुमकिन है किंतु हाथ की चूड़ियों को तो सरलता से गिना जा सकता है।”

बीरबल बोले, “हुजूर, औरतों का क्या, वे तो अपनी कलाइयों में कम-ज्यादा चूड़ियां पहनती रहती हैं। औरत के हाथों में कितनी चूड़ियां हैं बिना गिने बता पाना मुश्किल है। आप तो महल में प्रतिदिन ही जाते हैं। ऊपरी मंजिल पर जाने के लिए आप सीढ़ियां तो चढ़ते ही होंगे। हुजूर, आप बता सकते हैं कि कितनी सीढ़ियां हैं?

शहंशाह बोले, “मैंने कभी सीढ़ियों की संख्या की तरफ ध्यान ही नहीं दिया।”

बीरबल हंसते हुए बोले, “जहांपनाह, सीढ़ियों को तो घटाया-बढ़ाया भी नहीं जा सकता। वे वर्षों से एक ही संख्या में हैं, फिर भी वे कितनी हैं आपको मालूम नहीं तो भला मैं हर माह घटने-बढ़ने वाली चूड़ियों की संख्या कैसे बता सकता हूं?

फिर भी मैं दोषी हूं तो बंदे की गर्दन हाजिर है, हुजूर।”
बीरबल की इस बुद्धिमत्ता के आगे बादशाह अकबर निरूत्तर रह गए।

2.दूध भाई

एक शाम बादशाह अकबर ने बीरबल से कहा:

“बीरबल, हमारी दाई मां का बेटा हमारा दूध भाई है, क्योंकि मैंने दाई मां का दूध पीया है। क्या तुम्हारा भी कोई दूध भाई है?”

बीरबल बोले, “जी, जहांपनाह, है।”

बादशाह ने चुटकी लेते हुए कहा, “तो तुम उसे दरबार में क्यों नहीं लाते हो?”

बीरबल ने कहा, “जहांपनाह, वह अभी नन्हा-सा बच्चा है, दरबार में उसे नहीं ला सकता।”

शहंशाह अकबर बोले, “छोटा है तो क्या हुआ, कल तुम उसे दरबार में ले आओ।”

अब बीरबल मना भी तो नहीं कर सकते थे। वह बोले, “हुजूर , मैं आपके हुक्म का पालन करूंगा।”

घर आकर बीरबल ने गाय के बछड़े को खूब सजाया और दूसरे दिन उसे दरबार में लेकर पहुंच गए।

अकबर हैरान होते हुए बोले, “बीरबल, यह क्या है?” बीरबल सिर झुकाकर बोले, “हुजूर, यह मेरा दूध भाई है।” बादशाह बोले, “क्या बछड़ा तुम्हारा दूध भाई है?”

जवाब में बीरबल ने कहा, “हां, यही है। जिस गाय का मैं दूध रोज पीता हूं, यह उसी गाय का बछड़ा है बादशाह अकबर बीरबल की इस बुद्धिमत्ता पर खुश हो गए।

जिसका हम खाते हैं, उसका आदर करना चाहिए।

3.कुत्ता और दामाद

शहंशाह अकबर ने एक बार बीरबल से कहा:

“बीरबल, क्या तुम ऐसे प्राणी ला सकते हो, जिनमें से एक उपकार को मानता हो और दूसरा उपकार के बदले अपकार करने की सोचता हो?”

बीरबल कुछ देर तक चुप रहे, फिर ‘हां‘ में सिर हिलाकर चले गए।

दूसरे दिन बीरबल एक कुत्ता और अपने दामाद को लेकर दरबार में आए। फिर वह सिर झुकाकर बादशाह अकबर से बोले, “हुजूर, मैं दोनों प्राणियों को लेकर आया हूं। इनमें दोनों ही गुन हैं।”

बादशाह अकबर ने कहा, “ठीक है, लेकिन हमें इनके गुणों का पता कैसे चलेगा?”

बीरबल बोले, “जहांपनाह , यह कुत्ता है। केवल रोटी का एक टुकड़ा खाकर मरते दम तक अपने स्वामी की रखवाली करता है। इसे डंडे से पीटकर मालिक घर से भगा देता है तब भी यह बुलाने पर भागा-भागा चला आता है और उसी ईमानदारी के साथ मालिक को हर खतरे से बचाता है।” बीरबल यह कहकर चुप हो गए।

शहंशाह अकबर बोले, ‘और दूसरा प्राणी?” बीरबल थमती आवाज में बोले, “हुजूर, यह मेरा दामाद है। इसका स्वभाव ऐसा है कि लड़की का पिता अपना सबकुछ इसे क्यों न दे दे और स्वयं फकीर ही क्यों न बन जाए, फिर भी इसे चैन नहीं मिलता।”

अकबर बीरबल की बातें सुनकर क्रोधित हो गए और दामाद को गुस्से से घूरते हुए कहा, “ले जाओ, दामाद को सूली पर लटका दो और कुत्ते को दूध पिलाओ।”

बादशाह का हक्म सुनते ही बीरबल का पसीना छट गया। वह सिर झुकाकर नम्र स्वर में बोले. “हुजुर,मेरी बात को समझें। मैंने जो भी कुछ कहा, वह केवल अपने दामाद के लिए नहीं कहा, मैंने तो दुनिया के सारे दामादों की बात कही है।

जहांपनाह, क्या मेरे दामाद को ही दंडित करना उचित होगा? आप भी तो किसी के दामाद हैं या यहां पर जितने भी लोग हैं, वे सब किसी न किसी के तो दामाद हैं ही।”

बादशाह अकबर अचानक ही सहम गए और उन्होंने अपना हुक्म वापस ले लिया।

Akbar Birbal ki Kahaniya in Hindi

4.हम जैसा करते हैं वैसा पाते हैं

एक बार की बात है कि शहंशाह अकबर और बीरबल बगीचे में टहल रहे थे। अचानक बादशाह के दिमाग में एक सवाल आ गया। वह बीरबल की ओर देखते हुए बोले, “बीरबल, इस संसार में कोई गरीब है और कोई अमीर है। क्या बता सकते हो ऐसा क्यों है?

खुदा तो समदर्शी है और वह सबका ही मालिक है और सभी उसकी संतान है। एक पिता तो अपनी संतान का सदा भला चाहता है और सभी को एक समान देखता है। फिर खुदा परम-पिता होकर क्यों किसी को अमीर बना देता है और किसी को दो जून की रोटी के लिए भी तरसाता है?’ बादशाह
अकबर यह कहकर चुप हो गए।

बीरबल बहुत सोचने के बाद बोले, “हुजूर, खुदा ऐसा न करे तो कोई उसे खुदा मानेगा ही नहीं। दुनिया में पांच पिता होते हैं। आप भी उन पांच में से एक हैं अर्थात् अपनी प्रजा के पिता हैं।

आप तो किसी को दो सौ, किसी को चार सौ, किसी को सौ तो किसी को डेढ़ सौ और किसी को केवल चार-पांच रुपये की तनख्वाह देते हैं। जहांपनाह , आप ऐसा क्यों करते हैं? सबको एक नजर से क्यों नहीं देखते?”

बादशाह अकबर निरूत्तर हो गए और काफी सोच में पड़ गए। बीरबल समझ गए कि बादशाह असमंजस की स्थिति में हैं। अतः बीरबल बोले, “हुजूर , इसमें इतना दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है।

जो जिस तरह का काम करता है, वैसी ही उसको मजदूरी मिलती है और संसार ऐसे ही चलता है। यदि ऐसा न हो तो संसार चल ही नहीं सकता। ईश्वर कर्मों के अनुसार फल देता है। उसकी यह इच्छा कभी नहीं होती कि संसार के प्राणी दुःख उठाएं।

ईश्वर तो सबका भला चाहता है, अब कोई उसके बताए रास्ते पर नहीं चलता है तो उसे उसके कर्मों का फल भुगतना पड़ता है। जो परिश्रम करता है, अच्छा कर्म करता है, वह धनवान बनता है और जो कामचोर होता है, वह गरीब होता है। ईश्वर तो वही देता है, जो हम करते हैं, हुजूर।”

बीरबल की बातों से अकबर बादशाह खुश हो गए और बीरबल की तारीफ करते हुए अपने महल की ओर लौट गए।.

5.श्रेष्ठ हथियार वही, जी मौके पर काम आए

बादशाह अकबर ने दरबार में आते ही सवाल कर दिया, “सबसे श्रेष्ठ और उत्तम हथियार कौन-सा है?

एक दरबारी उठकर बोला, “जहांपनाह, भाला…. भाला उत्तम हथियार है।”

दूसरा दरबारी बोला, “नहीं हुजूर, तलवार।”

तीसरा दरबारी बोला, “नहीं जहांपनाह तीर-कमान।”

बादशाह को दरबारियों के जवाब से संतुष्टि नहीं मिली तो उन्होंने बीरबल की ओर देखा और कहा, “तुम्हारा क्या जवाब है, बीरबल?’

बीरबल सोचते हुए बोले, “हुजूर, मेरे विचार से उत्तम हथियार वही है, जो समय पर काम आए और अपनी श्रेष्ठता साबित कर दे।’

बादशाह अकबर असंतुष्ट होते हुए बोले, “यह कोई जवाब नहीं हुआ बीरबल।”

बीरबल बोले, “जहांपनाह , मैं अपनी बात को सिद्ध करके दिखा दूंगा।”

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अगली सुबह बीरबल अकबर बादशाह के साथ सैर के लिए निकले। बीरबल ने अपनी बात सिद्ध करने के लिए पहले से ही योजना बना ली थी। घूमते-घूमते वे दोनों एक सड़क पर आ गए। इतने में अचानक एक क्रोधित हाथी तेज गति से आता हुआ दिखाई दिया।

बीरबल घबराई हुई आवाज में बोले, “हुजूर! हाथी तो सनकी लगता है। देख नहीं रहे कैसे पैर पटकता हुआ आ रहा है।”

अकबर बादशाह भी घबरा गए, “हां, बीरबल! हम तो इतनी तेज भाग भी नहीं सकते, बीरबल।” यह कहते कहते बादशाह काफी घबरा गए।

उन्होंने कमर से लटक रही म्यान पर हाथ रखा तो बीरबल बोले, “जहांपनाह , यह क्या कर रहे हैं। मदांघ हाथी का मुकाबला भला तलवार से कैसे हो सकता है?” बीरबल यह बोल ही रहे थे कि तभी बादशाह के पैर के पास एक कुत्ते का पिल्ला आ गया।

बादशाह ने झट से पिल्ले को उठाया और आ रहे हाथी की सूंड की ओर फेंक दिया। कुत्ते का पिल्ला इतना डर गया कि बुरी तरह चिल्लाने लगा। हाथी घबराकर पीछे की तरफ हटता चला गया।

अकबर और बीरबल को भागने का मौका मिल गया। वे भागते हुए एक गली में आ गए। बीरबल बादशाह अकबर को माथे का पसीना पोंछते हुए देखकर बोले, “अब क्या कहते हैं, हुजूर, मैंने कोई गलत तो नहीं कहा था कि जो मौके पर काम आए, वही श्रेष्ठ हथियार होता है?”

अकबर बादशाह बोले, “हां बीरबल, कुत्ते का पिल्ला हथियार की गिनती में थोड़े ही आता है। लेकिन उसने ही हमारा बचाव उस मदांघ हाथी से किया। मौके पर वह न आता तो आज हम जिंदा न होते। तुम्हारा कहना सही था कि श्रेष्ठ हथियार वही है, जो मौके पर काम आए।” यह कहकर अकबर बादशाह ने बीरबल की बुद्धिमत्ता का लोहा मानते हुए उन्हें गले से लगा लिया।

Akbar aur Birbal ki Kahaniyan

6.बुद्धिमानों के बुद्धिमान

बादशाह अकबर अक्सर ही बीरबल की परीक्षा लेते रहते थे और बीरबल हमेशा ही पास हो जाया करते थे।

एक बार शहंशाह ने बीरबल को एक बकरी देते हए कहा. “बीरबल, इस बकरी को जितना खाना दिया जाता है, उससे दोगुना खाना तुम्हें देना है। लेकिन बकरी का वजन बढ़ना नहीं चाहिए।मैं एक हफ्ते के बाद स्वयं इसका वजन करूंगा।”

बीरबल अब करते क्या? बादशाह का हुक्म तो हुक्म होता है। बीरबल ने उस बकरी को दोगुना खाना देना शुरू कर दिया।’ वजन बढ़ने नहीं देना था, इसलिए हर रात वह एक कसाई को छुरी देकर बकरी के सामने बैठाने लगे। बकरी दिनभर खूब खाती और जब रात को हाथ में छुरी लिए कसाई को देखती तो उसकी हालत बहुत ही खराब हो जाती। न तो वह बैठ पाती और न ही सो पाती।

दोगुना खाना खाने के बाद भी उसका वजन नहीं बढ़ा।

एक हफ्ते बाद शहंशाह अकबर के सामने दरबार में बकरी को तोला गया। बकरी का वजन जरा-सा भी नहीं बढ़ा था। जितना पहले था, उतना ही था। शहंशाह अकबर को बहुत ही आश्चर्य हुआ।

उन्होंने बीरबल से कहा, “बीरबल, यह कैसे संभव हुआ, बकरी तो रोज दोगना खाना खाती है। वजन तो बढना चाहिए।” बीरबल बोले, “हुजूर, बकरी का वजन आखिर बढ़ता तो कैसे? हाथ में छुरी लिए एक कसाई रातभर उसके सामने बैठा जो रहता था। जो वह दिन में खाती थी, रात में कसाई की छुरी देखकर सब बराबर हो जाता था।”

“बहत खूब, बीरबल। तम्हारी इसी चतराई के तो हम कायल हैं। तुम बुद्धिमानों के बुद्धिमान हो, बीरबल।” बादशाह यह कहते-कहते हंस पड़े।.

7.न कम न अधिक

अपनी छोटी बेटी के बहुत जिद करने पर एक दिन बीरबल उसे दरबार में लेकर आए। उनकी बेटी भी उनकी तरह ही हाजिर-जवाब और वाचाल थी।

अकबर बादशाह को जब मालूम हुआ कि वह लड़की बीरबल की है तो उन्होंने प्यार से उसे अपने पास बुलाया और उससे बात करने लगे। लड़की शहंशाह से बहुत शीघ्र ही हिल-मिल गई।

तभी अचानक ही बादशाह ने कहा, “हमारी बेटी को बात करना भी आता है?” जवाब में बीरबल की बेटी बोली, “न कम न अधिक।” बादशाह लड़की का मुंह ताकने लगे। उन्हें उसकी बात समझ में नहीं आई थी। वह बोले, “तुम कहना क्या चाहती हो?”

बीरबल की बेटी ने कहा, “मैं यह कहना चाहती हूं कि बड़ों से कम बोलना चाहिए और छोटों से ज्यादा।” बादशाह सलामत लड़की की बुद्धिमत्तापूर्ण बात सुनकर खुशी के मारे गदगद हो गए।

Akbar Birbal Story in Hindi

8.बजुर्गों से मिला ज्ञान

बादशाह अकबर के मन में हमेशा कोई न कोई सवाल उठता ही रहता था। एक दिन बादशाह सलामत ने बीरबल से कहा, “बीरबल, दरबार में एक ऐसे आदमी को ढूंढ़ कर ले आओ, जो बहुत ही बुद्धिमान हो।”

बीरबल कुछ देर शांत रहे, फिर बोले, “जहांपनाह , मैं जल्दी ही ऐसा आदमी ढूंढकर दरबार में ले आऊंगा। लेकिन इसके लिए समय और धन की आवश्यकता पड़ेगी।”

बादशाह अकबर बोले, “बीरबल, सोने की 300 मोहरें और एक हफ्ते का समय हम तुम्हें देते हैं।”

धन और एक हफ्ते का अवकाश लेकर बीरबल अपने घर चले गए। सारा धन उन्होंने दीन-दुखियों में बांट दिया।

सप्ताह के अंतिम दिन बीरबल ने एक चरवाहे को पकड़ा और उसे स्नान करवाकर अच्छे कपड़े पहनाए तथा सोने की सौ मोहरें उसे देकर दरबार में ले आए। रास्ते में ही चरवाहे को बता दिया कि उसे बादशाह सलामत के सामने कैसा व्यवहार करना है।

बादशाह अकबर के दरबार में पधारते ही बीरबल ने कहा, “जहांपनाह , मैं बुद्धिमानों का बुद्धिमान व्यक्ति ढूंढकर लाया हूं।”

शहंशाह ने चरवाहे को देखते हुए पूछा, “तुम्हारे माता-पिता तुम्हें क्या कहकर बुलाते हैं? तुम कहां के रहने वाले हो। तुम कौन-सी खास बात जानते हो?” एक साथ इतने सवाल बादशाह अकबर ने कर दिए। लेकिन चरवाहे ने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया, क्योंकि बीरबल ने उसे पहले से ही चुप रहने के लिए कहा था।

बादशाह ने शिकायत भरे लहजे में बीरबल से कहा, “बीरबल, यह कहीं गूंगा और बहरा तो नहीं है? इसने तो हमारे किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। भला यह बुद्धिमानों का बुद्धिमान कैसे हो सकता है?”

बीरबल ने शीश नवा कर कहा, “हुजूर, यह इसकी बुद्धिमानी है। इसने अपने बड़े-बूढ़ों से सीख रखा है कि राजा और स्वयं से अधिक समझदार व्यक्ति के सामने चुप रहने में ही भलाई है। यह उनसे मिले ज्ञान का अनुसरण कर रहा है।”

बादशाह अकबर बीरबल के इस तर्क के आगे अब क्या बोलते। वे मुस्कराकर ही रह गए और चरवाहे को इनाम देकर सम्मान के साथ दरबार से विदा किया।

Akbar Birbal Stories in Hindi

9.दो माह का एक माह

शहंशाह अकबर के दिमाग में भी बैठे-बैठे असंभव को संभव बनाने के विचार उठते ही रहा करते थे। बीरबल उनके इस काम में मदद करते रहते थे। एक दिन अकबर ने बहुत सोचने के बाद फैसला लिया कि दो महीनों को एक महीना बनाया जाए

अपने फैसले को बहुत तोलने के बाद शहंशाह ने बीरबल को अपने इस फैसले से अवगत कराया।
बीरबल यह सुनकर हैरान रह गए, फिर शहंशाह की प्रशंसा करते हुए कहा, “जहांपनाह , इस तरह से इस दुनिया का तो आप भला ही करेंगे, क्योंकि चांदनी रात 15 दिन के बदले 30 दिन की होगी?”

शहंशाह अकबर बीरबल के इस तर्क पर और स्वयं को कुदरत के सामने मजबूर पाकर शर्मिंदा हो गए।

शहंशाह बोले, “बीरबल, हम दो माह को एक बना सकते हैं, पर कुदरत के नियमों को नहीं बदल सकते। यह तो सोचा ही नहीं। तुम महान हो, बीरबल। तुमने मुझे गलत फैसला लेने से पहले ही सचेत कर दिया।” यह कहते हुए बादशाह ने बीरबल को गले से लगा लिया।

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10.मैं नौकर आपका हूं, बैंगन का नहीं

बादशाह अकबर और बीरबल शाही बाग में बैठे, बैंगन की सब्जी पर बात कर रहे थे। शहंशाह बैंगन की प्रशंसा कर रहे थे और बीरबल भी उनकी हां-में-हां मिलाते जा रहे थे तथा बीच-बीच में बैंगन के औषधीय गुणों को भी गिनाते जा रहे थे।

इसके दो महीने बाद शहंशाह ने एक दिन सोचा कि देखें बीरबल की बैंगन के बारे में अब क्या राय है। बीरबल संयोग से उसी समय अकबर से मिलने आ गए।

अकबर बादशाह ने उन्हें सादर बैठाया और बैंगन की बुराई करने लगे। बीरबल भी शहंशाह की हां-में-हां मिलाने लगे और साथ ही यह भी कहने लगे कि हुजूर, क्या बताएं, बैंगन की सब्जी इतनी खराब है कि इसको खाने से बादी हो जाती है।

बादशाह बीरबल के मुंह से बैंगन की बुराई सुनकर हैरान रह गए और कहने लगे, “बीरबल, तुम्हारी इस बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता। हमने उस दिन बैंगन की प्रशंसा की तो तुमने भी प्रशंसा की और आज हमने बैंगन की बुराई की तो तुमने भी बुराई करनी शुरू कर दी। आखिर तुम्हारी अपनी कोई व्यक्तिगत राय बैंगन के बारे में क्यों नहीं है? बीरबल, यह सब क्यों?’

बीरबल बोले, “जहांपनाह , मैं आपका सेवक हूं, बैंगन का नहीं।” यह सुनकर शहंशाह की आंखें खुशी के मारे भर आईं। उन्होंने बीरबल को गले से लगा लिया।

11.नदी पति के घर जा रही है

Akbar Aur Birbal ki Kahani

वर्षा ऋतु थी। यमुना नदी में बाढ़ आई थी। लहरें किनारे पर आकर टकरा रही थीं, जिससे अजीब सी ‘छप-छप’ की आवाज होती थी। शहंशाह अकबर का महल यमुना तट पर ही था।

बादशाह गहरी नींद में सोए हुए थे। रात का सन्नाटा चारों तरफ फैला पड़ा था। छप-छप की आवाज जब बादशाह के कानों में पड़ी तो वह जाग गए और छप-छप की आवाज सुनने लगे। फिर इसके बाद बादशाह को नींद नहीं आई तो वह कमरे में ही उठकर टहलने लगे।

टहलते-टहलते वह खिड़की के पास आ गए और पानी से लबालब भरी यमुना नदी को बिना पलक झपकाए देखने लगे। लहरों की छप-छपाहट अभी भी उनके कानों में गुँज रही थी।

तभी उन्हें ऐसा जान पड़ा जैसे नदी रो रही हो। शहंशाह के मन में सवाल उठ खड़ा हुआ कि आखिर क्या बात है। रात के सन्नाटे में सब सो रहे हैं मगर नदी क्यों रो रही है? अपने इस प्रश्न का जवाब वह नहीं ढूढ़ सके तो बिस्तर पर आकर चुपचाप लेट गए।

दूसरे दिन शहंशाह दरबार में आए तो सभी दरबारियों से यही प्रश्न किया कि नदी रोती क्यों है?

बारी-बारी से सभी दरबारियों ने अपनी समझ के अनुसार जवाब दिया लेकिन किसी के भी जवाब से बादशाह को संतुष्टि नहीं मिली। इसी बीच बीरबल दरबार में पधारे। बादशाह ने बीरबल को देखते ही सवाल कर दिया, “बताओ बीरबल, नदी क्यों रोती है?”

बीरबल इस बेतुके सवाल पर कुछ देर तक हतप्रभ खड़े रहे फिर उन्होंने कहा, “जहांपनाह, मैं आपके सवाल का जवाब तभी दे सकता हूं जब मैं नदी का रोना अपने कानों से सुनूंगा।”

“बीरबल, नदी के रोने की आवाज तो मैं तुम्हें रात के सन्नाटे में ही सुना सकता हूं।” बादशाह ने यह कहकर बीरबल को देखा। बीरबल रात होने पर शहंशाह के महल में पहुंचे। बादशाह उन्हें अपने महल की खिड़की के पास ले गए और वह ‘छप-छप’ की आवाज उन्हें सुनाई और इसका कारण पूछा।

बीरबल अगले पल ही यह समझ गए कि यह तो पानी के बहने की आवाज है और बादशाह ने इसे ही नदी का रोना मान लिया है।

बीरबल झुककर बड़े ही विनम्र स्वर में बोले, “हुजूर, नदी अपने पिता के घर यानी पहाड़ से विदा होकर अपने पति यानी समुद्र के यहां जा रही है, जिससे वह पिता से अलग होने के गम में रोती जा रही है।’

बीरबल का जवाब इतना सटीक और हकीकत भरा था कि बादशाह अकबर खुशी के मारे गद्गद हो गए और कहा, “बीरबल, तुम्हारे पास तो हर सवाल का जवाब होता है। हम तुम्हारे जवाब से संतुष्ट हुए।”.

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