Akbar Birbal

आराम से जो मरे वो सुखी – Akbar Birbal ki Kahani

एक दिन की बात है जब बादशाह अकबर बीरबल के साथ सुबह की सैर पर निकले।

एक नंगे आदमी को देखकर उन्हें गुस्सा आ गया।

उन्होंने बीरबल से पूछा, “बताओ बीरबल, इस दुनिया में सबसे अधिक सुखी कौन है?”

मैं तरह तरह की वेशभूषा में लोगों को जीवन बिताते तथा अनेक प्रकार के भगवानों की पूजा/इबादत आदि करते देख कर असमंजस में पड़ गया हूं।

बीरबल, “मुझे मालूम है, अगर मुझे इस सवाल का जवाब कोई दे सकता है तो वो सिर्फ तुम हो ।”

बीरबल बोले, “हुजूर, कोई आदमी कितना सुखी है या कितना दुःखी है, इसका पता तो उसके मरने के बाद ही चल पाता है।

शहंशाह अकबर ने कहा- “बीरबल, तुम क्या कहना चाहते हो, हम समझे नहीं।”

बीरबल बोले, “जहांपनाह , आज जो आदमी सुखी है, वही कल को मुसीबत में पड़कर दुखी हो जाता है। |

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फिर ऐसे में किसी जिंदा व्यक्ति को कैसे सुखी या दुखी कहा जा सकता है।

यहां अनगिनत ऐसे आदमी हैं, जो दिखते तो सुखी हैं, पर उनका दिल दु:खों से भरा पड़ा है। फिर उन्हें सुखी कैसे कहा जा सकता है।

हुजूर, मेरी राय में तो “जो व्यक्ति सुखपूर्वक मरता है, वही सुखी होता है।”

बीरबल के इस जवाब को सुनकर शहंशाह बहुत प्रसन्न हुए और उनकी तारीफ करने लगे।

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